दसवीं कक्षा तुलसी के दोहे प्रश्न उत्तर | 10th Class Hindi Tulsi Ke Dohe Poem Notes

दसवीं कक्षा तुलसी के दोहे प्रश्न उत्तर भावार्थ,10th Class Hindi Tulsi Ke Dohe Poem Notes Question Answer Summery Bhavarth in Hindi Pdf 2022 Kseeb Solution For Class 10 Hindi Chapter 7 Notes Tulsi Ke Dohe Bhavarth in Hindi तुलसीदास के दोहे इन हिंदी

पाठ-7 तुलसी के दोहे

कवि परिचय :

तुलसीदास जन्म : सन् 1532 उत्तर प्रदेश के राजापुर में हुआ ।

माता-पिता माता का नाम हुलसी और पिता का नाम आत्मराम है ।

काल : भक्तिकाल के रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि है ।

रचनाएँ रामचरित मानस, विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली, दोहावली आदी ।

एक वाक्य में उत्तर लिखिए:

1. तुलसीदास शरीर को क्या मानते थे ?

उत्तर: तुलसीदास शरीर को मुखिया मानते थे ।

2. मुखिया को किसके समान रहना चाहिए ?

उत्तर मुखिया को मुख के समान रहना चाहिए ।

3. हँस का गुण कैसा होता है ?

उत्तर : हँस का गुण पानी रूपी विकारों को छोड़कर दूध रूपी अच्छे गुण पाता है।

4. मुख किसका पालन पोषण करता है ?

उत्तर मुख शरीर के सारे अंगों का पालन पोषण करता है

5. दया किसका मूल है।

उत्तर दया धर्म का मूल है।

6. तुलसीदास किस शाखा के कवि है ?

उत्तर: तुलसीदास भक्ति शाखा के कवि है

7. तुलसीदास के माता-पिता का नाम क्या है ?

उत्तर : तुलसीदास की माता का नाम हुलसी और पिता का नाम आत्मराम है।

8. तुलसीदास के बचपन का नाम क्या था ?

उत्तर : तुलसीदास के बचपन का नाम रामबोला था

9. पाप का मूल क्या है ?

उत्तर: अभिमान पाप का मूल है।

10. तुलसीदास के अनुसार विपत्ति के साथि कौन है ?

उत्तर : तुलसीदास के अनुसार विदद्य विनय विवेक विपत्ति के साथि है।

दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए।

10th Hindi Tulsi ke Dohe Question Answer

1. मुखिया को मुख के समान होना चाहिए । कैसे ?

उत्तर: जिस प्रकार मुँह खाने पीने का काम अकेला करता है और उससे सारे अंगों का पालन पोषण होता है । उसी प्रकार मुखिया को भी विवेकावान होना चाहिए, वह काम खुद करे लेकिन उसका फल सभी में बाँटे इसलिए मुखिया को मुख के समान है।

2. मनुष्य को हंस की तरह क्या करना चाहिए ?

उत्तर : हँस का गुण पानी रूपी विकारों को छोड़कर दूध रूपी अच्छा गुणा पाता है। इसी तरह मनुष्य अच्छे गुणों को अपनाना चाहिए।

3. मनुष्य के जीवन में चारों ओर प्रकाश कब फैलता है ?

उत्तर : जिस प्रकार देहरी पर दिया रखने से घर के भीतर और आंगन में प्रकाश फैलता है उसी तरह राम नाम जपने से मानव की आंतरिक और बाह्य शुध्दी होती है। जिससे मनुष्य के जीवन में चारों ओर प्रकाश फैलता है।

अनुरूपता

  1. दया : धर्म का मूल : : पाप : ________
  2. परिहरि : त्यागना : : करतार : ___________
  3. जीह : जीभ : : देहरी : _________

उत्तर :

  1. अभिमान का मूल;
  2. सृष्टिकर्ता;
  3. द्वार।

तुलसी के दोहे का भावार्थ लिखिए:

1) मुखिया मुख सों चाहिए, खान पान को एक।
पालै पोसै सकल अँग, तुलसी सहित विवेक ॥

तुलसीदास मुख (मुँह) और मुखिया के स्वभाव की समानता बताते हुए कहते हैं कि मुखिया को मुँह के समान होना चाहिए। मुँह खाने-पीने का काम अकेला करता है, किन्तु उससे सारे शरीर का पालन-पोषण होता है। मुखिया को भी ऐसे ही विवेकवान होना चाहिए कि वह काम इस तरह से करें कि उसका फल समाज के सब लोगों को समान रूप से मिले।

2) जड़ चेतन, गुण-दोषमय, विस्व कीन्ह करतार।
संत-हंस गुण गहहिं पय, परिहरि वारि विकार ॥

तुलसीदास संत की हंस पक्षी के साथ तुलना करते हुए उसके स्वभाव का परिचय देते हैं – सृष्टिकर्ता ने इस संसार को जड़, चेतन और गुण-दोष से मिलाकर बनाया है। अर्थात्, इस संसार में अच्छे-बुरे (सार-निस्सार), समझ-नासमझ के रूप में अनेक गुण-दोष भरे हुए हैं। हंस पक्षी जिस प्रकार दूध में निहित पानी को छोड़कर केवल दूध मात्र पी लेता है, उसी प्रकार संत भी हंस की तरह संसार में निहित गुण-दोषों में केवल गुणों को स्वीकार करके दोषों को त्याग देता है।

3) दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान।
तुलसी दया न छाँडिये, जब लग घट में प्राण ॥

तुलसीदास जी कहते है कि धर्म दया भावना से उत्पन्न होती है और अभिमान तो केवल पाप को ही जन्म देता है। मनुष्य के शरीर में जब तक प्राण हैं तब तक मनुष्य को अपना व्यर्थ अभिमान छोड़कर दयालु बने रहना चाहिए।

4) तुलसी साथी विपत्ति के विद्या विनय विवेक।
साहस सुकृति सुसत्यव्रत राम भरोसो एक ॥

इस दोहे में तुलसीदास जी ने विपत्ति अर्थात् बुरे समय के मित्रों के बारे में बताया है। तुलसीदास जी कहते है कि जब मनुष्य पर विपत्ति आ पड़ती है तब उसकी विद्या, विनय तथा विवेक ही उसका साथ निभाते हैं। राम पर भरोसा करनेवाला साहसी, सुकृतवान और सत्यव्रती बनता है।

5) राम नाम मनि दीप धरु, जीह देहरी द्वार।
तुलसी भीतर बाहिरौ, जो चाहसी उजियार ॥

तुलसीदास जी कहते हैं कि जिस तरह देहरी पर दिया रखने से घर के भीतर तथा आँगन में प्रकाश फैलता है, उसी तरह राम-नाम जपने से मनुष्य की आंतरिक और बाह्य शुद्धि होती है। यदि मनुष्य भीतर और बाहर दोनों ओर प्रकाश चाहता है अर्थात् लौकिक और पारलौकिक ज्ञान चाहता है, तो उसे मुख रूपी द्वार की जीभ रूपी देहरी अर्थात् जिव्हा पर राम नाम रूपी मणि का दीपक रखना होगा अर्थात् जीभ के द्वारा अखण्ड रूप से श्रीराम नाम का जप करना होगा।

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर :

1. तुलसी के दोहो द्वारा कैसा जीवन बिताने की सीख प्राप्त कर सकते है ?

उत्तर : तुलसी के दोहो द्वारा नैतिकता से जीवन बिताने की सीख प्राप्त कर सकते है।

2. रामचरित मानस यह किसकी कृति है ?

उत्तर रामचरित मानस यह तुलसीदास की कृति है ।

3. तुलसीदास को रामबोला नाम क्यों पड़ा ?

उत्तर : जब तुलसीदास का जन्म हुआ तब उन्होने राम नाम का उच्चारण किया था इसलिए तुलसीदास को रामबोला नाम पड़ा।

4. तुलसीदास का जन्म कब और कहाँ हुआ ?

उत्तर: तुलसीदास का जन्म सन् 1532 में उत्तर प्रदेश के राजापुर में हुआ ।

जोड़कर लिखिये :

अ ब
1) विश्व कीन्ह – अ) विकार
2) परिहरि वारि – आ) करतार
3) जब लग घट – इ) राम भरोसो एक
4) सुसत्यव्रत – ई) में प्राण

उत्तरः

1. आ;
2. अ;
3. ई;
4. इ।

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